लिखता हूँ, क्योँकि जिन्दा हूँ …

सांस है तो खुदा है, लिखता हूँ, क्योँकि जिन्दा हूँ । - सचिन धीरज

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गुजरा जब आज उस जगह से…

गुजरा जब आज उस जगह से, जहाँ कभी बचपन गुजरा करता था । सोचा की एक बार बैठ जाऊँ फिर से उस मिटटी पे , पर वहां तो पाऊँ रखने तक की जगह नहीं थी ।।                                                          - सचिन धीरज