गुजरा जब आज उस जगह से…

गुजरा जब आज उस जगह से, जहाँ कभी बचपन गुजरा करता था । सोचा की एक बार बैठ जाऊँ फिर से उस मिटटी पे , पर वहां तो पाऊँ रखने तक की जगह नहीं थी ।।                                                          - सचिन धीरज

छोटी सी बात

ज़िंदगी से परेशान एक सख्श मिला, मैंने पूछा क्यों भाई, बड़े परेशान दिख रहे हो, बात क्या है? उसने कहा क्या कहूँ भैया ! तीन बार खुदखिशी किया , साला हर बार बच जाता हूँ। मैंने कहा बेटा इश्क़ कर ले ।   Thanks for reading.

Shayari

अभी वो आँख भी सोई नहीं है अभी वो ख़्वाब भी जागा हुआ हैं| हमने करवट बदल के भी देखा, उस तरफ भी तुम याद आती हो |     Disclaimer: not my own creation.