When I was a child…

I started my schooling when I was 3 years old .Going to school was something I never enjoyed during my initial years. However,returning home brings equally joy. The moment I reach my home was used to be the best moment of my whole day.I used to hug my mother and narrate to her all my … Continue reading When I was a child…

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जो चोट खाकर बैठे है। 

kya baat !

KUCH RANG ZINDAGI KE With astha gangwar

जो चोट खाकर बैठे है

वो शायर बन बैठे है

टूटे दिल के सारे टुकड़े

अल्फाजो से जोड़ बैठे है

हाल ए दिल जमाने में

सुनाने और जाये कहां

कोरे पन्नो के सिवा

सब मशरूफ बैठे है

कोई मशगूल है खुद में

कोई किस्मत का मारा है

एक टूटा दिल लेकर के फिरता है

तो दूजे टूटे दिल का सौदा करने को बैठे है

आशिकी में है बस दर्द ही दर्द

खुशी का नाम झूठा है

जिसने की वो तो लुट ही गया

जिसने ना की वो करने को बैठे है

मालूम है कि दर्द ही मिलना है

मुकम्मल हो भी नहीं सकती

साथ छोङ चाहने वाले का

मुकद्दर का हाथ थामे बैठे है

अजीब है ये खेल जज्बातो का

साँसे तो आती जाती है

मगर किसी और के नाम से

ना जाने किसका दिल सीने में छुपाये बैठे है।

-आस्था गंगवार ©

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गुजरा जब आज उस जगह से…

गुजरा जब आज उस जगह से, जहाँ कभी बचपन गुजरा करता था । सोचा की एक बार बैठ जाऊँ फिर से उस मिटटी पे , पर वहां तो पाऊँ रखने तक की जगह नहीं थी ।।                                                          - सचिन धीरज

छोटी सी बात

ज़िंदगी से परेशान एक सख्श मिला, मैंने पूछा क्यों भाई, बड़े परेशान दिख रहे हो, बात क्या है? उसने कहा क्या कहूँ भैया ! तीन बार खुदखिशी किया , साला हर बार बच जाता हूँ। मैंने कहा बेटा इश्क़ कर ले ।   Thanks for reading.